उम्र-ए-दराज मांग कर लाये थे चार दिन,
दो आरजू में कट गये, दो इंतजार में..!!
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मरने की दुआएं क्यूं मांगूं , जीने की तमन्ना कौन करे
यह दुनिया हो या वह दुनिया, अब ख्वाहिश-ए-दुनिया कौन करे
मुईन अह्सन
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मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीं नया आसमाँ नहीं मिलता !
खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता !
नई ज़मीं नया आसमाँ नहीं मिलता !
खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता !
कैफी आजमी
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इतना तो ज़िन्दगी में किसी की ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून ना रोने से कल पड़े
जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी-पी के अश्क-ए-ग़म
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
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1 comments:
भाई नीचे "कैफ़ी आज़मी" भी लिख देते तो क्या बुरा था ??
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