Read this Blog\ Read this Blog in english at en.Chitthajagat.in .......स्वर्गवासी......................: शायरी...!!!!!!

Apr 8, 2008

शायरी...!!!!!!

उम्र-ए-दराज मांग कर लाये थे चार दिन,
दो आरजू में कट गये, दो इंतजार में..!!
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मरने की दुआएं क्यूं मांगूं , जीने की तमन्ना कौन करे
यह दुनिया हो या वह दुनिया, अब ख्वाहिश-ए-दुनिया कौन करे
मुईन अह्सन
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मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीं नया आसमाँ नहीं मिलता !

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता !
कैफी आजमी

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इतना तो ज़िन्दगी में किसी की ख़लल पड़े

हँसने से हो सुकून ना रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी-पी के अश्क-ए-ग़म

यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

कैफी आजमी

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1 comments:

मीत said...

भाई नीचे "कैफ़ी आज़मी" भी लिख देते तो क्या बुरा था ??